एक नज़म रिश्तों के नाम

एक   नज़म  रिश्तों  के  नाम

by Rajeev Kapoor on Monday, March 7, 2011 at 9:24pm
 
 आज बैठा तन्हाई  में  तो  सोचता  हूँ , क्या  खोया  क्या  पाया  मैंने
रिश्तों  की  दुकानदारी  के हिसाब  में , क्या  खोया  क्या  पाया  मैंने  

पुराने  रिश्ते  टूटे , पुराने  यार  छूटे  , नए  रिश्ते  जुड़े , नए  यार  मिले
ज़िन्दगी  के  इस  सफ़र  में  किसको  खोया , किसको  पाया  मैंने 

सोचता  हूँ  तो  दिल  डूब  सा  जाता  है , एक  खौफ  सा  नज़र  आता    है
दिल  की  गहराईयों   में  दफ़न  हो  के , सोचता  हूँ , क्या  खोया  क्या  पाया  मैंने

 एक  रंजिश  सी  गम  बन  कर  उभरती  है , जो  पुराने  रिश्तों  की  याद  दिलाती  है
रिश्ते  दिल  से  जुड़े  होते  हैं , कागज़  की  चंद   लकीरों  से  नहीं , आज  यह  पाया  मैंने .

 बस  में  मेरे  हो  अगर  "राजीव", सब  रिश्तों  को  निभाऊ   मैं 
दुनियादारी  को  छोड़  कर  सबको  सुख  पहुँचाओ   मैं  , आज  यह  तह  पाया  मैंने  .

Comments

  1. एक रंजिश सी गम बन कर उभरती है , जो पुराने रिश्तों की याद दिलाती है
    रिश्ते दिल से जुड़े होते हैं , कागज़ की चंद लकीरों से नहीं , आज यह पाया मैंने .
    wah wah Rajeev ji kiyaa baat hai.........

    ReplyDelete
  2. Very reflective Dost : Admi Admi ko kya de ga ....

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

Ab Ke Ham Bichhare To--------

Ranzish Hi Sahi---------