ना तुम कह सके न हम कह सके
ना तुम कह सके न हम कह सके, समझते तुम भी हो, समझते हम भी हैं.
दिल का अफसाना आँखों से कई बार सुनाया है तुमको
ज़िक्रे मोहब्बत बातों बातों में भी कई बार सुनाया है तुमको
इतनी नासमझ भी नहीं हो तुम, के समझ न सको मेरे इशारों को.
शायद कुछ न बोलने की तुमने कसम खाई है.
न तुम कह सके न हम कह सके, समझते तुम भी हो समझते हम भी हैं.
हुस्न अगर इश्क को न सताए तो यह हुसन की रुसवाई है
अपने बेकाम इश्क की दास्ताँ हमने खुद को ही कई बार सुनाई है.
बहरी नहीं हो ज़हन से तुम के समझ न सको मेरी खामोश कहानी को
शायद दर्दे इश्क ने पहले भी सताया है तुमको
ना तुम कह सके न हम कह सके, समझते तुम भी हो समझते हम भी हैं.
Shaid kuch bhi naa bolane ki tum nae kasam khai hai..........bahut accha likha hai ......
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