मिली नज़रें जो आज उनसे.....

मिली नज़रें जो आज उनसे, अपनी तरफ देखते पाया उनको
अब भी कुछ जगह बाकी  है उनके दिल में, यह कहते हुए पाया उनको
 
मिली नज़रें, फिर झुकी नज़रें, फिर से उठी नज़रें
जब भी देखा उनकी तरफ हमने सरगोशी से, अपनी तरफ देखते पाया उनको
मिली नज़रें जो आज उनसे, अपनी तरफ देखते पाया उनको...
 
मेरे दिल की गहरायों   की सदा अब भी पहुँचती है उन तक शायद
क्यूँ की कुछ लजा कर, कुछ सिमट कर, खुद से ही कुछ कहते पाया उनको.
मिली नज़रें जो आज उनसे, अपनी तरफ देखते पाया उनको....
 

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